Friday, January 2, 2026

एक शिक्षक को कैसा होना चाहिए ??

 आज बहुत दिनों बाद मेरी एक पुरानी मित्र ने मुझसे पूछा कि मैं लिखती क्यों नहीं अब और मैं पढ़ा करती थी तुम्हारे विचार ,बस इन्हीं दो लाइन से मन में आया की क्यों न कुछ लिखू,बीते कुछ सालों की व्यस्तता और महिलाओं की ज़िन्दगी ,घर बच्चे नौकरी सब साथ संभालना बहुत मुश्किल रहा पर इस बीच मैंने बहुत कुछ सीखा और जो सबसे ज़रूरी बात मैंने सीखी वो ये कि एक टीचर को कैसा  नहीं होना चाहिए और कैसा होना चाहिए। 

और अब मैं वही टीचर बनने की कोशिश करती हूँ ,जो हमें मिलना चाहिए था। 

टीचर ,अध्यापक ,गुरु और भी बहुत से नाम है जो हम सभी जानते है पर टीचर बनने से पहले आपको गुरु बनना पड़ता है ,

हालाँकि भारत में टीचर बनने के लिए विधिवत ट्रेनिंग और कई सारे एग्जाम पास करने होते हैं और उसके बाद भी कितने टीचर है जो सही मायने में गुरु बन पाए और जो टीचर है उनकी कुशलता पर नौकरी लगने के बाद क्यों एग्जाम नहीं होते अगर ऐसा होता तो देश के ज़्यादातर बच्चे अपने ट्यूशन टीचर को अपना सही मायने में गुरु मानने कि बजाय अपने स्कूल टीचर को अपना गुरु मानते। 

बस कुछ ही टीचर के नाम याद हैं हमें और उनसे हम आज तक जुड़े भी हैं ,बाकि से शायद कभी सामना हो भी तो शायद ही कुछ लोग होंगे जिनसे हम  मिलना चाहेंगे। 

सबसे बड़ी बात ये है कि हमारे देश में बाल मनोविज्ञान टीचर ट्रैनिंग के दौरान पढ़ाया तो जाता है फिर उसके बाद सब उसे भूल जाते हैं  बस एक ही शिक्षक ने मुझे बहुत प्रभावित किया जो मन से एक टीचर है और यह सब उनके कार्यों में झलकता है और हमें ऐसे टीचर की ही ज़रूरत है। 



-ऐसा टीचर जिससे बच्चे अपने डाउट खुल कर क्लियर कर सके। 

-एक ऐसा टीचर जो सभी बच्चों को सिर्फ अपना स्टूडेंट समझे। 

-एक ऐसा टीचर जिससे सवाल पूछने में बच्चे डरते न हो। 

-जो बच्चों को सोचने पर मजबूर करे कि हम आखिर ये पढ़ क्यों रहें हैं और बच्चो के मन में सवाल जगाये। 

-जो बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान न दे बल्कि बच्चो को भी एक किताब की तरह पढ़  कर उनकी समस्याओं को समझे और समाधान दे । 

-जिसकी नज़र में सभी बच्चे एक समान हो। 

-जो एक पल  मैं बच्चों की शैतानी पर गुस्सा करे और अगले पल उनकी प्रयासों पर सबसे पहले ताली बजाये। 

-जो न सिर्फ जीत का जश्न मनाये बल्कि उनकी हार को अगली जीत की तैयारी बताये। 



सबसे ज़रूरी बात जो बच्चे पहले से अच्छा कर रहे है  उनको पढ़ाना कोई बड़ी बात नहीं ,बात तो तब है जब आप एक कमज़ोर बच्चे को अच्छा करने के लिए प्रेरित कर पाओ  और उनके लिए प्रेरणा बन जाओ। 



इसलिए वही टीचर बनिए जिसकी आपको अपने स्कूल के समय में चाह थी ,आप खुद वही बन जाइये और अपने विद्यार्थियों को प्रेरित कर एक स्वस्थ दिमाग का निर्माण कीजिये। 

क्योंकि आप सिर्फ टीचर नहीं गुरु हैं इसलिए सही मार्गदर्शन कीजिये। 

                                                                                                             

                                                                                                                   Artist-Anjani Arya

धन्यवाद।  

Tuesday, April 21, 2020

पिघलता सा आसमान

कितना आसान है एक आज़ाद पंछी की उड़ान को रोक पाना ??उसके पंखों को नोंच कर फेंक देना या फिर उसके अस्तित्व को अलग सांचे में ढालने  की कोशिश करना  ,पर क्या इतना सब करने पर भी आप कामयाब हो पाते हो ,तो यहाँ पर जवाब है नहीं,बिलकुल भी नहीं ,क्योंकि जिसने आसमान को छूने का सपना देख लिया है वो इन नाकाम कोशिशों से नहीं डरता और आगे बढ़ता जाता है।
क्या तेज़ाब की एक छोटी सी बोतल किसी के सपनों पर पानी फेर सकती है या वो पिघलता शरीर अपने भविष्य की इमारतों को गिरा सकता है ,अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप यहाँ पर गलत है ,एक इंसान तब तक नहीं हार  सकता जब तक वो खुद से न हार जाये।
पर यहाँ पर ये सोचने की ज़रूरत है कि क्या  मानसिक स्थिति होती है जब कोई  एक ऐसे चेहरे पर तेज़ाब डालने की सोचता है  जिसे वह  प्यार करने का दावा करता है ,जिसके साथ सारी  ज़िन्दगी बिताना चाहता है और उसकी एक न सुनने पर वो उसे झुलसा देता है ,क्या ये प्यार है ?
प्यार का मतलब हम क्यों हमेशा सही नहीं समझ पाते ,क्या ज़रूरी है प्यार बॉलीवुड की फिल्मों जैसा ही हो ,क्या  ज़रूरी है उसके माथे पर आपके नाम का लेबल लगाना या फिर उसी के साथ सारी ज़िन्दगी बिताना, चाहे वो आपके साथ अपनी ज़िन्दगी न बांटना चाहता हो ,किसने दिया आपको ये अधिकार कि आप किसी को मजबूर करे की वो तुमसे प्यार करे नहीं तो छीन लिया जायेगा उसका चेहरा ,पर नहीं छीन सकते उसका आत्मविश्वास ,उसकी पहचान ,जो नहीं मोहताज है किसी चेहरे की और यहाँ पर भी तुम कामयाब नहीं हो पाते हो।
यहाँ पर एक बात है कि अगर दोस्त या परिवार कभी गुस्सा कर दे तो क्या  यही करना चाहिए ?
नहीं न,तो फिर क्यों जिससे प्यार का दावा किया उसके साथ अलग बर्ताव क्यों ??
क्या हुआ अगर वो तुम्हारा नहीं हुआ ,पर तुम तो उससे प्यार करते हो और ये प्यार एक न के बाद क्यों नफरत में बदल जाता है ,अगर ऐसा है तो सोचने की ज़रूरत है कि था ही नहीं और ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाइये।
भले ही आप एक रिश्ते में रहने के बाद भी अलग हुए हो , तब भी कड़वी यादें भूल कर ,मीठी यादों के साथ अपना जीवन ,दिल में कोई बोझ रखे बिना बिताइए।
सच में अगर प्यार करते हैं तो उसकी ख़ुशी में  ही अपनी ख़ुशी ढूंढ लीजिये ,क्योंकि प्यार कभी नफरत में नहीं बदलता ,क्या परिवार से दूर होने पर आपका प्यार नफरत में बदल जाता है  तो फिर यहाँ पर सब क्यों बदलता है ??
इसलिए अगर आप किसी से प्यार करने का दावा करते हैं तो उसे इज़्ज़त दीजिये ,खुशियां दीजिये  ,जिससे कि वो भले ही आप से प्यार न करती हो पर आपको सम्मान ज़रूर देगी।
यहाँ पर परिवार और समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान है ,दोनों को  ही ज़रूरत है घर में बच्चों को स्वस्थ माहौल मुहैय्या करवाने की ,लड़कियों का सम्मान और उनके अस्तित्व से पहचान करवाने की और उनके दिमाग में औरतों की एक नयी परिभाषा गढ़ने की ,

" कि  नहीं है वो अबला ,वो सशक्त है ,धुरी है ज़िन्दगी की ,
उसके सम्मान में झुकने में तुम भी सम्मान ही पाओगे ,
वो भी तुम जैसी ही है ,उसको भी  पहचान के तो  देखो ,
सिर्फ पत्नी ,माँ ,बहन या बेटी ही क्यों ,
कभी दोस्त ,कभी साथी या किसी अनजान को जान के तो देखो।
अपने ही जैसा पाओगे उसे भी ,वही सोच ,वही परिवार ,वही प्यार ,
कभी इस इस लिंग भेद को  अपनी सोच से निकाल कर तो देखो।
  बस एक रचना ही तो है जो तुमसे कुछ अलग है ,
इस अंतर को कभी एक नयी पहल से मिटा कर तो देखो।
रच डालो एक नया संसार ,कि जिसमें उसे डर  न हो ,
कहीं जलती ,कहीं कराहती और
कहीं इन सबसे बिना गुज़रे हुए भी  वो इसे महसूस करती न हो
अकेले मैं बैठ जो चिल्लाना चाहती हो ,जो दिल खोल  कर रोना चाहती हो ,
उसकी आँखों से बरसते उस दर्द को  जड़ से मिटा कर तो देखो।
हज़ारों सपनें बैठे है उसकी आँखों में ,कभी उन्हें पढ़ कर तो देखो।
वो सशक्त है ,उससे ही संसार  है ,इस सच को स्वीकार  करके तो देखो।

मैंने इस विषय में जो भी लिखा है ,वो लिखने का विचार मुझे "छपाक " फिल्म देखने के बाद आया ,बहुत कुछ चल रहा था मन में ,उसे आज कुछ लाइनों में समेटने की कोशिश की है ,इस फिल्म में हमने एक विजेता का संपूर्ण  संघर्ष देखा है ,और न जाने कितनी ऐसी वीरांगनाएं हैं जो  जीत रही  हैं  दुनिया से ,उस हर सोच से जो इसके पीछे की वजह है और कुछ दुनिया ही छोड़ गयीं हैं ,उन सभी को मेरा नमन है।
पर यहाँ  पर जानने लायक बात यह है कि कोई कितना भी मिटाना  क्यों न चाहे ,हिम्मत की लकीर एक दिन सफलता का रास्ता ज़रूर बनाती है और सपने ज़रूर सच होते है।
अगर मैंने कुछ गलत लिखा हो  तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।
धन्यवाद।


Thursday, April 16, 2020

यमुनोत्री गर्ल्स हॉस्टल @KEC द्वाराहाट

चलिए आपको ले चलती हूँ ,यमुनोत्री गर्ल्स होटल ,कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट ,गंगोत्री गर्ल्स हॉस्टल अगर आपने नहीं पढ़ा तो आप इसे यहाँ plotsforthoughts.in
 पढ़ सकते हैं ,गंगोत्री गर्ल्स हॉस्टल में जो सबसे यादगार पल है वो है हमारे बर्थडे ,जो रात के 12 बजे सेलिब्रेट होते थे और सब बी ० टेक ० और एम ० सी ० ए ० की लड़कियां साथ मानती थी ,बर्थडे गर्ल को दूसरे रूम में भेजकर रूम को सजाया जाता था ,सब अपनी अपनी विशेज़ लिखते थे और 12 बजते ही शुरू हो जाता था बर्थडे और बर्थडे बम्स ,और बर्थडे गर्ल को हवा में उछालने  का सिलसिला और पार्टी।
सेकंड ईयर में आते ही हम पहुँच गए यमुनोत्री ,जहाँ बी ० टेक ० फाइनल ईयर  और एम ० सी ० ए ० सेकंड ईयर और फाइनल ईयर को रूम्स अलॉट होते थे और वहाँ हमारी वार्डन थी वही डैमी मैडम जिनका असली नाम मुझे आज भी नहीं पता ,लड़कियों से पूछा तो उन्होंने दमदमी माई बताया 😂😂😂 और जब भी वो आती थी सन्नाटा छा जाता था और जाने के बाद हंसी के फुव्वारे 😂😂
गंगोत्री से यमुनोत्री जाने में हम बहुत कुछ पीछे छोड़ आये ,फर्स्ट ईयर की यादें ,वो प्यारी सी त्रिमूर्ति और कुछ जाते हुए लोग जो हमेशा के लिए मन में बस गए ,हमारी बहुत प्यारी सुपर सीनियर्स ,पहले यमुनोत्री में मेस नहीं हुआ   करती थी तो इसलिए हमें गंगोत्री जाने का सौभाग्य मिलता रहा और फिर आये हमारे जूनियर्स ,और अब हम बन चुके थे सीनियर्स ,क्या फीलिंग थी सीनियर बनने की मैं बता नहीं सकती ,और फिर शुरू हुआ रैगिंग लेने का सिलसिला ,वही सब फिर से जो हमने किया था वही हमने भी करवाया ,अरे भई परंपरा थी ,ऐसे कैसे छोड़ देते ऊपर से सीनियर बनने का जोश वो अलग ,फिर वापिस  हम अपने यमुनोत्री ,जहाँ सबको सिंगल रूम मिलता था और बालकनी भी और बीच में सुन्दर सा गार्डन  और गॉंव का नज़ारा जहाँ सुबह लोग खेती करते हुए दिखते थे ,थर्ड सेम तो सिंगल रूम मिलने की ख़ुशी ,पकवान खाने में ,रैगिंग लेने  में और फ्रेशर्स  में, सीनियर्स  को फेयरवेल देने में निकल गया जिसकी बहुत सी यादें हैं ,वो साड़ियों का ट्रायल ,वो ड्रेस कोड ,वो मेकअप करना सीखना और फेयरवेल की तैयारी के पीछे हॉस्टल टाइम के बाद हॉस्टल पहुंचना 😂😂और बहुत सारी  ट्रीट्स और भी बहुत कुछ।
यहाँ पर मैं एक वीडियो के बारे में बताना चाहूंगी जो मेरी प्यारी सहेली पर फिल्माया गया था वो भी उसकी प्लेट में बैठे चावल के एक एक  दाने का 😂😂शायद बहुत ज़रूरी हो 😂 वो बहुत टेंशन में थी पर बाद में पता लगा कैमरा ही ऑफ था 😂😂😂😂😂😂
वो हमारे फैकल्टीज का हॉस्टल कैंपस में घर ,वो सर की बागवानी और सर का गाना जो उन्हें पता नहीं होगा कि हमने सुन लिया था और वो हम पाँचों का हिम्मत करके ,नहीं  बहुत ज़्यादा हिम्मत करके सर के घर जाना और बार बार भाग जाना 😂😂😂😂और फिर से हिम्मत जुटा के असाइनमेंट की डेट आगे बढ़वाना और फिर भागते हुए हॉस्टल वापिस आ जाना 😂😂😂😂और असाइनमेंट्स  का क़हर अब और ज़्यादा बढ़ गया था ,अब टीपने का एकसूत्रीय कार्यक्रम चलने लगा था पर वो भी पकड़ा गया तो शब्द बदले जाने लगे पर काम चल रहा था और दिन की शुरुवात वैसी ही जैसी गंगोत्री में थी बस यहाँ पानी  स्टोर करना होता था ,यहाँ एक मग्गा पानी लेने में उतना ही लौटाना भी होता था बाकायदा निशान लगा के  😂😂 वो हॉस्टल कैंपस  गेट पर एकलौती दुकान जहाँ से रिचार्ज और  मैगी  ली जाती थी ,वो रूम में पुलाव बनाना ,मैक्रोनी और मैगी का वो ज़माना  लोहड़ी मनाना ,वो बी ० टेक ० की लड़कियों के साथ यादगार पल ,उनमें से एक  यादगार पल है ,दो लड़कियां  एक को पकड़ के बाथरूम में फ़ेंक आती थी 😂😂 वो थी शैतानो की नानियाँ ,इतनी ज़ोर से दौड़ती थी लगता था भूकंप आ गया ,शुरू में हमे बहुत  गुस्सा आता था पर बाद में हम भी उन्हीं में  शामिल हो गए , और यही मुझे मिली मेरी स्कूल की दोस्त तो फिर जान पहचान और बढ़ गयी।
वो शाम की चाय के बाद घूमना ,और क्रश के नाम से एक दूसरे को चिढ़ाना और फिर हमारे सब-जूनियर्स का आना और फिर कुछ ही दिन के  मेहमान  होने का एहसास होना और पुराने बी ० टेक ० फाइनल का जाना और नया फाइनल का आना और वो  रात को घूम के चेक करना की किस के रूम की लाइट  जल रही है कौन पढ़ रहा है और फिर खुद सो जाना😂😂😂😂 ,वो एग्जाम के एक दिन पहले बर्थडे मनाना  और  वो लड़कियों के फुल वॉल्यूम में बजते गानों के बीच उन्हें दुआएं  देते हुए पढ़ने की कोशिश करना 😂😂😂😂 हमने सबको बहुत दुआएं दी हैं खासकर अपने टीचर्स को और नामकरण भी  किये और मेरा जो दुआ प्रोग्राम शुरू होता था वो ब्रश  करने से रात को सोने तक शुरू रहता था 😂😂😂😂
वो हमारा मोबाइल कंप्यूटिंग के एग्जाम  की सुबह एक के रूम में इकठ्ठे  हो कर आंसू बहाना 😂😂😂😂
 वो हर एग्जाम के बाद दुनागिरि जाना और अगले सेम में शुरू दिन से पढाई करने की प्रतिज्ञा लेना और फिर से वही ढाक के तीन पात हो जाना ,और हमारे फाइनल ईयर तक सेवी भी खुल गया था  हमारे हॉस्टल में ,तो हमने सेवी का भी आनंद उठा ही लिया आने से पहले।
वो फेयरवेल की तैयारी ,वो फेयरवेल में हमारा धमाल  और वो गाना "पल ये हैं प्यार के पल "और सीनियर्स और बी ० टेक ० गर्ल्स की डायरी लिखते लिखते कब अपनी डायरी लिखवाने का टाइम आ गया पता ही नहीं चला ,और मैंने वो हर एक डायरी अभी  सम्हाल के रखी है ,क्योंकी ये सिर्फ डायरी नहीं ,यादें हैं  ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत  लम्हों  की जो फिर कभी वापिस   नहीं आते तो अगर आप पास आउट हैं तो  उठाइये अपनी डायरी और घूम आइये फिर से एक बार अपने प्यारे कॉलेज और अगर आप अभी पढ़ रहे हैं तो  खुल के एक एक पल का आनंद लीजिये क्योंकि ज़िन्दगी ये  पल फिर नहीं दोहराएगी और रह जाएँगी बस यादें  और नम्बर्स जो अब कभी मिलते नहीं क्योंकि सब बिजी हैं  व्हाट्सप्प है ,तो जो डायरी में कीप इन कांटेक्ट लिखा जाता है वो कभी फिर होता नहीं ,पर कुछ अच्छे दोस्त भी बनते हैं जो हमेशा साथ रहते हैं और बाकियों की होती हैं तो बस यादें।

Monday, April 13, 2020

कुमाऊँ की थाली से


कुमाऊँ  की थाली से मैं आज आपके लिए लायी हूँ भट्ट के डुबके ,ये उत्तराखंड में कुमाऊं का  पारम्परिक भोजन है और चावल के साथ खाया जाता है ,इसकी रेसिपी मैं इसलिए लायी हूँ क्योंकि जब भी मैंने इसकी रेसिपी ऑनलाइन ढूंढने की कोशिश की ,ये मुझे कहीं पर नहीं मिली ,इसलिए जब भी कोई उत्तराखंड की इस डिश को   बनाना चाहे तो वो आसानी से इसे ढूंढ पाए।
इसे मैं लायी हूँ अपनी मौसी की रसोई से सीधे आपके लिए।
सामग्री :
भट्ट की दाल : एक कटोरी
चावल : चार चम्मच
जम्बू : ये पहाड़ी जड़ी होती है ,जिसका इस्तेमाल तड़के के लिए होता है
गदरेड़ी : ये पहाड़ी जड़ी होती है ,जिसका एक टुकड़ा हम ले सकते हैं
लहसुन : एक गाँठ
हींग : एक चुटकी
नमक ,मिर्च स्वादानुसार
बनाने का तरीका :
सबसे पहले भट्ट की दाल को चावल के साथ धो कर रात भर के लिए भिगोने डाल दें और सुबह मिक्सी में या सिल बट्टे पर भिगाये हुए दाल चावल , लहसुन,गदरेड़ी और मिर्च डाल के पीस लीजिये।
नोट:सिल बट्टे में पीसेंगे तो ज़्यादा स्वादिष्ट बनेगीऔर आप पिसी हुई मिर्च भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
लोहे की कढ़ाही में तेल गरम करें और उसमें हींग का और जम्बू का तड़का लगाए और पिसी हुई दाल को कढ़ाही में डाल दें  और थोड़ा पतला होने तक पानी मिला दें  और स्वादनुसार नमक मिलाये और धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दीजिये और तब तक पकाएं जब तक उसमें बुलबुले बनने बंद हो जाये और डुबको के छींटे बाहर निकलना शुरू हो जाये। अब चावल के साथ इसे परोसिये ,खुद भी खाइये और औरों  खिलाइये।
इसमें  जो गाँठ   है वो गदरेड़ी हैंऔर दूसरी  जम्बू है। 


भट्ट की दाल 
धन्यवाद। 

Saturday, April 11, 2020

गंगोत्री गर्ल्स होस्टल @KEC द्वाराहाट अल्मोड़ा

 गंगोत्री आप शायद समझ नहीं पाए होंगे की ये अल्मोड़ा में कैसे आ गया  ,तो सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगी कि ये कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट अल्मोड़ा के गर्ल्स होस्टल का  नाम है।
तो ये तो हुआ आपका परिचय ,जब हम कॉलेज में पढ़ रहे थे तब दो ही होस्टल्स हुआ करते थे ,बाद में और भी नए होस्टल्स बन रहे थे तब हम पास आउट हो चुके थे।
तो शुरू करते हैं ,कुमाऊं इंजीनियरिंग  कॉलेज द्वाराहाट ,जो अल्मोड़ा से कुछ 35 किमी दूर है और बहुत ही भव्य और सुन्दर इसका परिसर है ,खासकर एडमिन ब्लॉक ,हमारे समय में दो ही कोर्स थे बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० ,हमें सुअवसर मिला एम० सी ० ए ० में पढ़ने का ,क्योंकि शौक था सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का।
 हमें पहले साल सौभाग्य मिला गंगोत्री में रहने का ,फर्स्ट ईयर बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० दोनों वही ठूंसे जाते थे ,बस शुरू हुआ कॉलेज  का सफ़र और उससे भी यादगार हॉस्टल का सफ़र ,हम पांच लड़कियां थी हमारे कोर्स में बाकि लड़के थे ,तो यही से शुरू हुआ हॉस्टल का सफ़र जहाँ एक रूम में तीन लड़कियां होती थी ,पहले कुछ मेलमिलाप फिर  घरवालों से फ़ोन पर बात करने के लिए खिड़कियों पर लटकना या फिर थैलियों को खिड़की में टांग कर उसमे फ़ोन रखकर हैडफ़ोन से घरवालों से बात करना और वो हच के सिग्नल जो ढूंढने पड़ते थे ,खैर  हम उन्हें ढूंढ ही लेते थे ,और रात को वाशरूम अकेले जाने में डरना और सबका मज़ाक उड़ाना।
मामू की मेस और मेस वाले भैय्या लोग ,और वो मेस में लगा एक्वा गार्ड का पानी सब कमाल था और आखिरकार हमारे सीनियर्स ने हमें दर्शन दिए ,यहाँ पर मैं आपको बताना चाहूंगी की हमारे सीनियर्स और सुपर सीनियर्स (मैम्स ) सब बहुत प्यारी थी पर कानून तो कानून होता है तो रैगिंग तो लेनी थी पर बहुत ही हैल्दी रैगिंग थी और मुझे बहुत मज़े आये और शुरू हुए नियम तेल लगी चोटी,फ्लैट चप्पल ,पिन अप दुपट्टा और सीनियर्स को उनकी चप्पलों से पहचानने का सिलसिला,और आँखें झुकाने का  ,और एक चीज़ जो बहुत अच्छी थी कि  हमारे सीनियर्स हमें कहीं भी हो  साथ जाने को बोलते थे ,वो बायोडाटा, जाने कितने बनाये होंगे ,पर पहली बार लिखने में मज़ा आया था और बाद में पूछिए मत ,सीनियर्स का रूम पर आना और फिर शुरू होता था हमारा डांस सेशन और गाना ,और इंट्रो और इन सब में उस नए माहौल में ढलने के लिए हमारी मदद करने वाली हमारी सीनियर्स ही थीं और पाँचों ही बहुत प्यारी थी ,एक नटखट और  चुलबुली ,एक बहुत खूबसूरत ,और दूसरी दबंग और एक मेरे ही जैसी और एक पढ़ाकू,ये थी हमारी सीनियर्स और हमने इनके चेहरे फ्रेशर्स के बाद ही देखे थे पर हम छुप छुपा के मैम्स को देख ही लिया करते थे और उनकी चप्पलों के रंग से लेकर उनका बायोडाटा सब याद करवाया गया था हमें ,तो फिर थे हमारे सुपर सीनियर्स ,उनमें चार मैम्स  थी और वहां तो हमने ग़ज़लों पर भी डांस किया था ,होश वालो को खबर क्या ,पहले जब ये गाना  सुनते थे तब पता नहीं था कि कभी इस पर डांस भी करना होगा पर रैगिंग में भी हमें बहुत मज़ा आया और फिर फ्रेशर्स के बाद हम आज़ाद थे पर अभी भी हमने साथ ही जाना होता था और हम पांचो ने पहाड़ भी एक साथ ही छान मारे  और फिर एग्जाम और वो रातों को जागना और 2 बजे रात को वो मैगी और कॉफी का बनाना और फिर बर्तन कौन धोएगा उसके लिए महाभारत ये बात और है कि बर्तन दो ही थे पर फिर  भी लड़ाई ज़रूरी थी।
और यहाँ पर मैं बी ० टेक ० फर्स्ट ईयर को भी आपसे मिलवाना चाहूंगी जिनसे हमारी रैगिंग के दौरान दोस्ती हुई थी  ,उस समय आपको हॉस्टल में रात को दो बजे बाल धोती लड़कियां मिल जाएँगी क्योंकि सुबह बिना तेल के बाहर  नहीं जा सकते थे।
हॉस्टल में सुबह ही बाल्टी बाथरूम में लगा कर  घेर लिया जाता था ,ये भी एक बहुत मेहनत का काम होता था ,कभी  कभी इस पर भी जंग छिड़ती थी ,कपड़े धोना भी एक बहुत बड़ा काम था और जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था ,वो था चाय का समय जब पाँचों साथ बैठकर गप्पे लगाते थे ,मिमक्री करते थे और कॉलेज में हुई एक एक बात का बाल की खाल निकालने तक परीक्षण होता था और  वो असाइनमेंट्स ,तब हमारे नए टीचर्स आये थे  ,जो हमे असाइनमेंट्स पर असाइनमेंट्स देते रहते थे और हम बहुत परेशान ,और आज हमें ये समझ नहीं आता कि टीचर्स ने हमको ज़्यादा परेशान किया या हमने उनको 😂हमारे टीचर्स होटल के ही कैंपस में रहते थे और हम उनके दिखते ही छुपने के लिए तैयार रहते थे ,यहाँ पर मैं कहना चाहूंगी की हमारे सभी टीचर्स बहुत अच्छे थे और जो असाइनमेंट पे असाइनमेंट देते थे तो हम भी तैयार रहते थे ,एक मास्टर कॉपी बनती थी और हॉस्टल में छपाई शुरू ,वैसे हम उसे वहां टीपना कहते थे 😂 और यहाँ पर बातों ही बातों में मैं आपको गंगोत्री के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य से मिलाना भूल ही गयी ,जो थे हमारे प्यारे पप्पू जी।
ये पप्पू जी एक तरह का कीड़ा हुआ करते थे ,लाल और काली धारियों वाले और जिसे भी ये  बाइट देते थे वह  स्थिति भयावह होती थी तो कोशिश रहती थी की पप्पू जी से बच के रहा जाये और न ही हमें ये सुअवसर प्राप्त हुआ।
हॉस्टल का जो मुख्य भाग था वो था कॉरिडोर जहाँ पर आपको बेसुरा गाना गाती हुई,कभी फोन पर बिजी तो कभी पढ़ती हुई लड़कियाँ मिल जाएँगी और एक होता था कॉमन रूम जहाँ आपको टीवी के रिमोट के लिए झगड़ती लड़किया भी मिल जाएँगी और फिर एक नाम सुनने में आया ,पहले तो समझ ही नहीं आया कि है कौन ?फिर बाद में पता लगा वो थी हमारी हॉस्टल वार्डन ,नाम मैं यहाँ पर नहीं लूंगी पर है वो वैसी ही थी जैसा सुना था। वो सुबह दूसरे के गिलास चुरा के उसमें चाय लाना और जूठा गिलास उसी के कमरे में रख आना और फिर वो नोंक झोंक ,वो एक दूसरे के कपड़े पहनना और अपने कपङे न मिलने पर दोस्तों की अलमारी में ढूंढना ,वो पानी भर के रखना और एक मग्गा पानी लेने के लिए भी लड़ जाना ,वो सिंटिला की मस्ती और आरोहण का खुमार, वो सी ० एच ० सी ० की यादें ,वो सबका एक के बीमार पड़ने पर एक दूसरे की देखभाल करना।
वो छत पर लेट कर तारों को देखना ,वो घर से आती कचौरियां और रसगुल्ले और मक्के दी रोटी  और सरसो दा  साग जो सब   खाते थे सिवाय उसके जो लाता था ,यहाँ पर मैं आपको "पकवान" से मिलवाना चाहूंगी जिसे हमारी प्रिय सहेली लायी थी पर ये और बात हैं की मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसे पकवान कहते क्यों हैं ,क्योंकि नाम सुनते ही बड़ी आशायें  जाग जाती हैं 😂
लिखने को बहुत कुछ है ,पर तीन साल एक पन्ने पर लिखना मुश्किल है ,अगर आप चाहेंगे तो यमुनोत्री पर भी प्रकाश डाला जायेगा ,पसंद आये तो प्लीज कमेंट और  फॉलो करें।

धन्यवाद्।

Friday, April 10, 2020

लॉक डाउन का सदुपयोग

आज के समय में  पूरा विश्व लॉक डाउन में जी रहा है और ये  समय जो हमें मिल रहा है ये हम सभी के  लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है ,अगर इसका सदुपयोग किया जाये ,तो आइये जानते हैं कुछ तरीके  लॉक डाउन को सदुपयोगी  बनाने के -
  •  अच्छे दिन की शुरुआत   के लिए छत पर या घर के आँगन में ही टहल लीजिये ,सुबह  की धूप से थोड़ी गर्माहट  लीजिये जो  आपके शरीर में विटामिन -डी की कमी पूरी करेगा ,क्योंकि गर्मियों  ने दस्तक दे दी है ,तो सुबह  का समय उपयुक्त है। 
  • सुबह की चाय  के साथ अपनी पसंदीदा किताब के  कुछ पन्ने  पलट लीजिये ,कोई मोटिवेशनल किताब ,जो आपको ज़िन्दगी से मिलवा दे। 
  • खाने  में कुछ नया बनाने की कोशिश कीजिये ,पौष्टिक और घर का बना खाइये ,क्योंकि  जो चीज़े हम बाजार से लेकर खाते है वो घर पर भी बनायीं  जा सकती है ये बात लॉक डाउन ने ही बताई है। 
  • अपना पसंदीदा काम कीजिये ,अगर आपको लिखना पसंद  हो तो खेलियें विचारों से शब्दों के साथ  ,पेंटिंग  पसंद हैं तो भर लीजिये रंगो को  अपनी ज़िन्दगी में ,डांस पसंद  है तो  थिरक लीजिये समय की धुन पर  या कुछ और। 
  • अपनी  कमज़ोरी पर काम कीजिये ,और उसमें निपुण  हो जाइये  और  उसे अपनी ताकत बना लीजिये। 
  • कोई एक नयी चीज़ सीखिए ,जो आप कभी सीखना चाहते  हो  पर सीख   न पाए हो ,तो लॉक  डाउन का भरपूर फायदा उठायें और इंटरनेट पर उपलब्ध साधनों  से सीख लीजिये। 
  • परिवार के साथ समय बिताएं और मिलजुल कर एक दूसरे का सहयोग कीजिये ,जिससे की आप परिवार के साथ समय भी बिता पाएंगे और सम्बन्ध भी मधुर हो जायेंगे,मैं अपनी कहूं तो ,मैं अपने पति के भरपूर सहयोग के कारण ही अपना ब्लॉग लिख पा रही रही हूँ। 
  • शाम के समय घूमे ज़रूर ,आपको आजकल सभी लोग छत पर ही मिलेंगे ,कुछ पतंग उड़ाते , कहीं छत पर घूमते लोग ,कुछ गपियाते ,आपके अपने जैसे लोग। 
  • सबसे ज़रूरी अच्छी नींद लीजिये और ऊपरवाले का धन्यवाद् कीजिये कि हम स्वस्थ हैं,खुश हैं। 
लॉक डाउन का सदुपयोग कीजिये और घर पर रहिये ,सुरक्षित रहिये ,देश  सहयोग करें। 
धन्यवाद। 

Thursday, April 9, 2020

मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत।

 मन के   हारे  हार है ,मन के जीते जीत ,ये मैंने लगान फिल्म में सुना था और बस तब से इसे अपना लिया ,पर क्या ये सच है और क्या ऐसा होता है ?
ज़िन्दगी में कभी कभी ऐसा समय आता है ,जब आप खुद से ही हार जाते हैं ,शायद औरों से आप लड़ भी लें  और जीत भी जाए पर जहाँ पर आप खुद को खो देते हैं तब स्थिति बहुत मुश्किल हो जाती हैं कि खुद को कैसे संभाले या खुद को वापिस कैसे पाएं ,किसी और को ढूंढना आसान है ,जब आप खुद ही खो जाओ ,दूर हो जाएँ अपने आप से तो फिर कैसे वापिस लाया जाये ?
बहुत बार ऐसा समय आता है जब सुबह आपके लिए कोई नया दिन नहीं लाती ,मन यही कहता है कि काश सुबह ही न हो ,दो तरह से आप जूझ रहे होते हैं,एक खुद को वापिस पाने के लिए और दूसरा दुनियां  की बातों से और उन अपेक्षाओं से जो आपको थी कभी खुद से और आपके परिवार को आपसे ,पर इस परिस्थिति को समझना और इससे गुज़रना दोनों बहुत अलग बातें हैं ,क्योंकि बिना इस रास्ते पर चले हुए आप इस सफर को नहीं समझ सकते ,सफर एक एकांत का ,दूर दूर तक छाये अँधेरे का और बिना मंज़िल के एक कभी न ख़त्म होता लगता ये रास्ता शायद जिसमें आप हमेशा के लिए खो जायेंगे पर क्या हमें खुद को ऐसे ही छोड़ देना चाहिए या कोशिश करनी चाहिए खुद को ढूंढने की ?
हो सकता हैं कभी आपको इस अँधेरे से निकालने कोई देवदूत आ जाये  ,वो कोई भी हो सकता है ,आपका प्यारा दोस्त या  परिवार   ,मेरे साथ मेरी सबसे प्यारी दोस्त थी ,और मैं आज भी उसकी शुक्रगुज़ार हूँ कि  वो मेरे  मुश्किल समय से मुझे निकाल लायी ,पर ऐसा हमेशा नहीं होता ,कभी आप के साथ कोई नहीं होता ,और आप बिल्कुल अकेले होते हो ,तब आपके सामने केवल दो ही विकल्प बचते हैं कि या तो परिस्थितियों के सामने घुटने टेक दिए जाए या फिर आप अपना परचम फ़हरा दिया जाये  और जहाँ तक है सभी की  यही राय होगी की आप जीत जाए।
 कठिन समय शुरू हो जाता है वहाँ से ,जहाँ पर कोशिशें होती हैं ,दूसरों को खुश करने की हर हाल में ,जहाँ पर  उम्मीदें खुद की बजाय दूसरों से लग जाती हैं ,और  शुरू करते हैं खुद को दूसरो की नज़रों से देखना ,तौलते रहते हैं खुद को दूसरों के बनाये मापदंडो के आधार पर ,खुद को अनदेखा कर अनगिनत कोशिशें करना  और इस पूरे दृश्य में "मैं " कहीं खो जाता है और फिर से टूटने लगते हैं ,आत्मसम्मान को पहुँचायी गयी चोट से ,मनोबल को तोड़ने की अनगिनत कोशिशों से ,क्योंकि यही वो पूरा परिदृश्य है ,जिसमें न चाहते हुए भी आप अपनी खुशियों की ज़िम्मेदारी दूसरों को सौंप देते हैं,और उम्मीद करते हैं बदले में उन्ही खुशियों की और जब नहीं पाते हैं तो आप टूटना शुरू हो जाते हैं ,यहाँ पर ज़रूरत हैं खुद को ढूंढने की ,दूसरों से उम्मीद लगाने से अच्छा है वो उम्मीदें आप खुद से लगएँ  ,और कोशिश कीजिये उन्हें पूरा करने की ,सिर्फ अपने लिए ,और झोंक दीजिये खुद को उसे पूरा करने की राह में ,भले ही आप कामयाब हो या न हो पर अपनी उम्मीदों और सपनों  की तरफ आपका बढ़ाया एक कदम भी आपको ख़ुशी से भर देगा।
ढूंढ लाइए खुद को ,पहचानिये खुद को,ढूंढिए कुछ सवालों के जवाब कि आप क्या चाहते हैं ,सिर्फ आप क्या चाहते हैं और निकल जाइये  इस सफर पर अकेले ही अपने साथ  पाने वही जो आप चाहते हैं ,बिना  ये सोचे की कोई क्या सोचेगा और ढूंढ लीजिये अपनी खुशियां खुद ही ,क्योंकि खुशियां कहीं नहीं खोती बस आप खो देते हैं खुद को ,तो पा लीजिये अपनी खुशियों को।
कभी अपनी किसी किताब को पूरा करने का जश्न मना लीजिये तो कभी उगते सूरज की लाली अपने होंठो पे सजा लीजिये और मुस्कुराते रहिये और धन्यवाद कीजिये उस उपरवाले का जो हमेशा आपके साथ है।
 चटक धूप में जब कभी  ठंडी हवा का एक झोंका आपको सहला जाये  तो महसूस कर लीजिये उन अपनों को जो आपसे बहुत दूर जा चुके हैं ,उनके प्यार को जो वो आज भी आपको भेज रहे हैं।
जुड़ जाइये सकारात्मक और ज़िंदादिल लोगो से ,कुछ बातें अगर आप नहीं भूल पा रहे हैं और जो आपको परेशान करती रहती हैं ,यकीं मानिये मुश्किल नहीं है भूलना और मत कीजिये एक भी कोशिश उन्हें भुलाने की बस बदल लीजिए अपने सोचने का तरीका ,प्रेरणा लेना शुरू कीजिये उन बातों से ,आंकलन  कीजिये दूसरों  का नहीं अपने आप का ,स्वीकार कीजिये गलतियां जो आप से हुई हैं दूसरों  को खुश करने की चाह में और सुधार लीजिये उन गलतियों को ,और सबक लीजिये ज़िन्दगी से जो वो आपको सिखाती है ,कभी न दोहराने की उन गलतियों को फिर से और उभर जाइये हर उस बात से जो अभी तक आपको दुखी करती है और शुरू कीजिये ज़िन्दगी को खुद के लिए जीना ,खुश होना।
तैयार कीजिये अपने अंदर एक ऐसा योद्धा जो तैयार है ,सभी नकारात्मक विचारों को,बातों को प्रेरणा में बदलकर आगे बढ़ने के लिए ,और सकारात्मकता को अपने विचार और व्यवहार में भरने के लिए , प्रयासरत रहिये खुद को बेहतर बनाने के लिए ,और बन जाइये वही जो आप बनना चाहते हैं।
तोड़ दीजिये हर उस सोच को जो आपके विचारों को बेड़ियों से बांधे  हुई है ,छोड़ दीजिये दूसरों की परवाह करना  और वही कीजिये जो आपको सही लगता हैं ,खुद को आज़ाद कर लीजिये हर पैमाने से जो मापता हो आपके हंसने के तरीके को ,बात करने के लहजे को  या फिर आपके हर अंदाज़ को ,क्योंकि आप कैसे जीना चाहते हैं ये आपका फैसला होना चाहिए न कि  दूसरों   का।
कोई फर्क नहीं पड़ता की आप आज किन ऊंचाइयों को छू  रहे हैं या छूना चाहते हैं ,फर्क बस इतना है कि क्या आप  ये सब कुछ पाकर खुश है ,क्योंकि ज़िन्दगी एक ही बार मिलती है और ये हम सबने बहुत बार सुना है और शायद कहा भी होगा ,तो मन में ठान लीजिये कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो ,"मन के हारे हार है,मन के जीते जीत "  और फहरा दीजिये परचम अपनी खुशियों का ,जीने के अंदाज़ का और भर दीजिये सभी को अपनी सकारात्मकता से ,खुशियों से।
धन्यवाद।

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