Friday, January 2, 2026

एक शिक्षक को कैसा होना चाहिए ??

 आज बहुत दिनों बाद मेरी एक पुरानी मित्र ने मुझसे पूछा कि मैं लिखती क्यों नहीं अब और मैं पढ़ा करती थी तुम्हारे विचार ,बस इन्हीं दो लाइन से मन में आया की क्यों न कुछ लिखू,बीते कुछ सालों की व्यस्तता और महिलाओं की ज़िन्दगी ,घर बच्चे नौकरी सब साथ संभालना बहुत मुश्किल रहा पर इस बीच मैंने बहुत कुछ सीखा और जो सबसे ज़रूरी बात मैंने सीखी वो ये कि एक टीचर को कैसा  नहीं होना चाहिए और कैसा होना चाहिए। 

और अब मैं वही टीचर बनने की कोशिश करती हूँ ,जो हमें मिलना चाहिए था। 

टीचर ,अध्यापक ,गुरु और भी बहुत से नाम है जो हम सभी जानते है पर टीचर बनने से पहले आपको गुरु बनना पड़ता है ,

हालाँकि भारत में टीचर बनने के लिए विधिवत ट्रेनिंग और कई सारे एग्जाम पास करने होते हैं और उसके बाद भी कितने टीचर है जो सही मायने में गुरु बन पाए और जो टीचर है उनकी कुशलता पर नौकरी लगने के बाद क्यों एग्जाम नहीं होते अगर ऐसा होता तो देश के ज़्यादातर बच्चे अपने ट्यूशन टीचर को अपना सही मायने में गुरु मानने कि बजाय अपने स्कूल टीचर को अपना गुरु मानते। 

बस कुछ ही टीचर के नाम याद हैं हमें और उनसे हम आज तक जुड़े भी हैं ,बाकि से शायद कभी सामना हो भी तो शायद ही कुछ लोग होंगे जिनसे हम  मिलना चाहेंगे। 

सबसे बड़ी बात ये है कि हमारे देश में बाल मनोविज्ञान टीचर ट्रैनिंग के दौरान पढ़ाया तो जाता है फिर उसके बाद सब उसे भूल जाते हैं  बस एक ही शिक्षक ने मुझे बहुत प्रभावित किया जो मन से एक टीचर है और यह सब उनके कार्यों में झलकता है और हमें ऐसे टीचर की ही ज़रूरत है। 



-ऐसा टीचर जिससे बच्चे अपने डाउट खुल कर क्लियर कर सके। 

-एक ऐसा टीचर जो सभी बच्चों को सिर्फ अपना स्टूडेंट समझे। 

-एक ऐसा टीचर जिससे सवाल पूछने में बच्चे डरते न हो। 

-जो बच्चों को सोचने पर मजबूर करे कि हम आखिर ये पढ़ क्यों रहें हैं और बच्चो के मन में सवाल जगाये। 

-जो बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान न दे बल्कि बच्चो को भी एक किताब की तरह पढ़  कर उनकी समस्याओं को समझे और समाधान दे । 

-जिसकी नज़र में सभी बच्चे एक समान हो। 

-जो एक पल  मैं बच्चों की शैतानी पर गुस्सा करे और अगले पल उनकी प्रयासों पर सबसे पहले ताली बजाये। 

-जो न सिर्फ जीत का जश्न मनाये बल्कि उनकी हार को अगली जीत की तैयारी बताये। 



सबसे ज़रूरी बात जो बच्चे पहले से अच्छा कर रहे है  उनको पढ़ाना कोई बड़ी बात नहीं ,बात तो तब है जब आप एक कमज़ोर बच्चे को अच्छा करने के लिए प्रेरित कर पाओ  और उनके लिए प्रेरणा बन जाओ। 



इसलिए वही टीचर बनिए जिसकी आपको अपने स्कूल के समय में चाह थी ,आप खुद वही बन जाइये और अपने विद्यार्थियों को प्रेरित कर एक स्वस्थ दिमाग का निर्माण कीजिये। 

क्योंकि आप सिर्फ टीचर नहीं गुरु हैं इसलिए सही मार्गदर्शन कीजिये। 

                                                                                                             

                                                                                                                   Artist-Anjani Arya

धन्यवाद।  

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