Thursday, April 2, 2020

खुद से प्यार की राह में

क्या कभी आपने खुद को शीशे में देखते हुए सोचा कि आप से ज़्यादा प्यारा  ऊपरवाले ने कुछ बनाया नहीं ?
एक बार मन में खुद से सच बोलिये , क्या कभी आपको लगा नहीं  कि  अपनी पसंद का कुछ किया जाये ,दुनिया को कुछ देर किनारे पर रखकर किनारा ढूंढ लिया जाये ?
अगर आपका जवाब नहीं है, तो एक बार खो  जाइये  भीड़ से ,और पा लीजिये   अपने आप को,जिसे आप भूल चुके है शायद ,कभी अपने सपनों  के पीछे भागते हुए या ज़िन्दगी जो जी रहे हैं उसमे खुद को भूलते हुए या फिर आसमान को  छूने  की कोशिश में  ज़मीन से छूटे जा रहे हैं /
दुनिया को  समेटने की कोशिश में आप खुद से ही खुद में सिमट रहे हैं हैं ,और अगर आप ये सब करके शांति महसूस करते और सच्ची ख़ुशी का अनुभव कर रहे है ,तब मुझे कहना होगा की शायद आप सही जा रहे है,और अगर नहीं तो आपको ज़रूरत है उस इंसान से प्यार करने की जिसे आप हमेशा अनदेखा करते आ रहे है हैं,और वो हैं आप। 
बस एक बार खुद से प्यार करके देखिये ,बजाय दूसरों से ये आशा करने की कि वो आप से प्यार करे ,वो आपको महत्पूर्ण समझे , आप ही एक कदम बढ़ाइए खुद से प्यार करने के लिए क्योंकि दूसरों की तरफ ना जाने कितने  कदम आपने बढ़ाये होंगे पर तब भी आपने वो नहीं पाया होगा जो आप चाहते हैं ,तो शुरू कीजिये खुद को खोजना ,शीशे में निहार लीजिये खुद को क्योंकि आपसे सुन्दर कोई और हैं नहीं ,मत सोचिये की आपका रंग क्या है,आपके नैननक्श कैसे है या फिर आप कैसे दिखते  हैं ,आप जैसे भी दिखते हो बस प्यार कीजिये खुद से,क्योंकि  आप इससे कही ज़्यादा हैं, सच कहते हैं  लोग कि  खूबसूरती ही सब कुछ नहीं है पर क्या हर्ज़ है अगर आप थोड़ा संवरने लगे सिर्फ अपने लिए ,लोग क्या कहेंगे उसकी परवाह नहीं कीजिये , लोगो के कहने की चिंता आप लोगो पर ही छोड  दीजिये न,अगर उनकी चिंता भी आप करने लगे तो लोग क्या करेंगे फिर ,उन्हें भी जीने दीजिये और आप भी  खुद के लिए जी लीजिये। 
कभी संवार  भी लीजिये अपने बालों को ,प्यार कीजिये  अपनी हर चीज़ से ,अगर मैं अपनी कहूँ तो शायद आप यकीं  नहीं मानेंगे की कॉलेज में  परीक्षा से ठीक एक दिन पहले भले ही कितना ही तनाव क्यों न  हो जाये ,मैं अपने बालों को खोल के उन्हें लहराना नहीं भूलती थी ,भले ही मेरे दोस्त मुझे उस समय पागल की संज्ञा देते हो पर मुझे ऐसा करने से बहुत ख़ुशी मिलती थी और मैं खुद को पचासों  दफा निहारती थी और हर बार यही दोहराया करती थी कि  मैं कितनी सूंदर हूँ,भले ही मैं सामान्य लगती हूँ ,पर मुझे खुद  को देख कर हमेशा यही लगता था की मैं कितनी प्यारी  हूँ  और मैं ख़ुशी से भर उठती  थी। 
आज  हम खुद को  ही भूलते जा रहे हैं ,क्यों न फिर से जिया जाये ,क्यों न फिर से अपना पसंदीदा गाना सुना जाये ,अपनी पसंद का खाना बनाया जाये  और बाकियों को भी खिलाया जाये,क्यों न हम  खुशियों की उम्मीद  लगाने की बजाये खुद ही खुशियां बाँट  आयें । 
खुद के शरीर को मापदंडो  में  उलझा कर दुखी होने से बचा जाये,स्वीकार  कीजिये खुद को आप जैसे भी हैं ,आप  बहुत अच्छे हैं और मैं यहाँ पर कहना चाहूंगी कि  है अगर आप गलत जा रहे हैं तो खुद को सुधारने में  कोई  बुराई नहीं पर जिन पर आपका वश नहीं चलता आप उन्हें खुले दिल से स्वीकार कीजिये  क्योंकि  जो आपके पास है शायद कहीं कोई उसके लिए भी तरस रहा  होगा,खुद को स्वीकारिये और संवार लीजिये  और जी जाइये। 
बाथरूम सिंगिंग अगर  आपको पसंद  है तो कीजिये ,अगर दिमाग में  कुछ न कुछ घूमता ही रहता है तो उस विषय पर  खुद से  ही बात कर  लीजिये और समाधान  ढूंढ निकालिये ,कभी कुछ पुराने पन्ने पलटिये और मुस्कुरा लीजिये  और कुछ नये पन्ने  अपनी ज़िदगी में जोड़ लीजिये और उन्हें सम्हाल लीजिये अपनी डायरी में। 
कभी जी लीजिये  अपने पहले प्यार का वो खूबसूरत एहसास ,और महका लीजिये अपनी हर सांस को  उसकी यादों  से आती हुई खुशबु से ,अगर  पूरा है तो जी जाइये नहीं तो कुछ मीठी यादों के साथ ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाइये  ,स्वीकार कीजिये जो जैसा है उसे वैसे ही क्योंकि  बच्चन जी ने कहा हैं -मन का हो तो अच्छा न हो तो और  अच्छा ,तो बह चलिए खुद से मिलने ,खुद के प्यार में  बह जाइये जहाँ पर सिर्फ आप हो और हो बहुत सारी खुशियां  जो आपने चुनी हैं  आपने अपने लिए। 
थिरक लीजिये कभी अपनी पसंदीदा धुन  पर ,कभी गुनगुना लीजिये जो मन करे, दिमाग के आदेशों के अनुसार तो हमेशा जीते ही आये हैं कभी मन से भी जी लीजिये ,कभी सुन लीजिये मन की जो आपसे कुछ  कहना चाहता हो पर आपका दिमाग उसे चुप करा देता है। 
खिलखिला लीजिये  कभी ,परवाह करना छोड़ दीजिये  कि कोई क्या कहेगा , अजी  उन्हें भी कहने दीजिये पर आप खुद  के लिए जी लीजिये नहीं तो लोगो की परवाह करने के पीछे कभी ज़िन्दगी ही न ख़त्म हो जाये। 
इसलिए  दौड़ जाइये कभी हरे भरे खेतों में  खुले आकाश के नीचे ,तारों को देख लीजिये कभी  आपको शुक्र  और सप्तऋषि  मंडल के दर्शन हो जाये ,गुनगुनी धूप में कभी सब कुछ भूल के सो जाइये ,कभी घूम आइये अपनी  बचपन की गलियों में अपने प्यारे दोस्त के साथ और जी लीजिये फिर से वही लम्हे ,वही  कुल्फी ,वही गोलगप्पे  या जो आपको पसंद हो। 
जो आपको न समझते हो उन्हें समझाने की बजाय खुद को समझना शुरू कीजिये ,जीने दीजिये  और खुद भी जी जाइये ,ढूंढना ही है अगर तो खुशिया ढूँढ़िये ,सुकून की नींद ढूंढिए और कोशिश कीजिये पाने की  और बस जी लीजिये। 
धन्यवाद 

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