Thursday, April 9, 2020

मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत।

 मन के   हारे  हार है ,मन के जीते जीत ,ये मैंने लगान फिल्म में सुना था और बस तब से इसे अपना लिया ,पर क्या ये सच है और क्या ऐसा होता है ?
ज़िन्दगी में कभी कभी ऐसा समय आता है ,जब आप खुद से ही हार जाते हैं ,शायद औरों से आप लड़ भी लें  और जीत भी जाए पर जहाँ पर आप खुद को खो देते हैं तब स्थिति बहुत मुश्किल हो जाती हैं कि खुद को कैसे संभाले या खुद को वापिस कैसे पाएं ,किसी और को ढूंढना आसान है ,जब आप खुद ही खो जाओ ,दूर हो जाएँ अपने आप से तो फिर कैसे वापिस लाया जाये ?
बहुत बार ऐसा समय आता है जब सुबह आपके लिए कोई नया दिन नहीं लाती ,मन यही कहता है कि काश सुबह ही न हो ,दो तरह से आप जूझ रहे होते हैं,एक खुद को वापिस पाने के लिए और दूसरा दुनियां  की बातों से और उन अपेक्षाओं से जो आपको थी कभी खुद से और आपके परिवार को आपसे ,पर इस परिस्थिति को समझना और इससे गुज़रना दोनों बहुत अलग बातें हैं ,क्योंकि बिना इस रास्ते पर चले हुए आप इस सफर को नहीं समझ सकते ,सफर एक एकांत का ,दूर दूर तक छाये अँधेरे का और बिना मंज़िल के एक कभी न ख़त्म होता लगता ये रास्ता शायद जिसमें आप हमेशा के लिए खो जायेंगे पर क्या हमें खुद को ऐसे ही छोड़ देना चाहिए या कोशिश करनी चाहिए खुद को ढूंढने की ?
हो सकता हैं कभी आपको इस अँधेरे से निकालने कोई देवदूत आ जाये  ,वो कोई भी हो सकता है ,आपका प्यारा दोस्त या  परिवार   ,मेरे साथ मेरी सबसे प्यारी दोस्त थी ,और मैं आज भी उसकी शुक्रगुज़ार हूँ कि  वो मेरे  मुश्किल समय से मुझे निकाल लायी ,पर ऐसा हमेशा नहीं होता ,कभी आप के साथ कोई नहीं होता ,और आप बिल्कुल अकेले होते हो ,तब आपके सामने केवल दो ही विकल्प बचते हैं कि या तो परिस्थितियों के सामने घुटने टेक दिए जाए या फिर आप अपना परचम फ़हरा दिया जाये  और जहाँ तक है सभी की  यही राय होगी की आप जीत जाए।
 कठिन समय शुरू हो जाता है वहाँ से ,जहाँ पर कोशिशें होती हैं ,दूसरों को खुश करने की हर हाल में ,जहाँ पर  उम्मीदें खुद की बजाय दूसरों से लग जाती हैं ,और  शुरू करते हैं खुद को दूसरो की नज़रों से देखना ,तौलते रहते हैं खुद को दूसरों के बनाये मापदंडो के आधार पर ,खुद को अनदेखा कर अनगिनत कोशिशें करना  और इस पूरे दृश्य में "मैं " कहीं खो जाता है और फिर से टूटने लगते हैं ,आत्मसम्मान को पहुँचायी गयी चोट से ,मनोबल को तोड़ने की अनगिनत कोशिशों से ,क्योंकि यही वो पूरा परिदृश्य है ,जिसमें न चाहते हुए भी आप अपनी खुशियों की ज़िम्मेदारी दूसरों को सौंप देते हैं,और उम्मीद करते हैं बदले में उन्ही खुशियों की और जब नहीं पाते हैं तो आप टूटना शुरू हो जाते हैं ,यहाँ पर ज़रूरत हैं खुद को ढूंढने की ,दूसरों से उम्मीद लगाने से अच्छा है वो उम्मीदें आप खुद से लगएँ  ,और कोशिश कीजिये उन्हें पूरा करने की ,सिर्फ अपने लिए ,और झोंक दीजिये खुद को उसे पूरा करने की राह में ,भले ही आप कामयाब हो या न हो पर अपनी उम्मीदों और सपनों  की तरफ आपका बढ़ाया एक कदम भी आपको ख़ुशी से भर देगा।
ढूंढ लाइए खुद को ,पहचानिये खुद को,ढूंढिए कुछ सवालों के जवाब कि आप क्या चाहते हैं ,सिर्फ आप क्या चाहते हैं और निकल जाइये  इस सफर पर अकेले ही अपने साथ  पाने वही जो आप चाहते हैं ,बिना  ये सोचे की कोई क्या सोचेगा और ढूंढ लीजिये अपनी खुशियां खुद ही ,क्योंकि खुशियां कहीं नहीं खोती बस आप खो देते हैं खुद को ,तो पा लीजिये अपनी खुशियों को।
कभी अपनी किसी किताब को पूरा करने का जश्न मना लीजिये तो कभी उगते सूरज की लाली अपने होंठो पे सजा लीजिये और मुस्कुराते रहिये और धन्यवाद कीजिये उस उपरवाले का जो हमेशा आपके साथ है।
 चटक धूप में जब कभी  ठंडी हवा का एक झोंका आपको सहला जाये  तो महसूस कर लीजिये उन अपनों को जो आपसे बहुत दूर जा चुके हैं ,उनके प्यार को जो वो आज भी आपको भेज रहे हैं।
जुड़ जाइये सकारात्मक और ज़िंदादिल लोगो से ,कुछ बातें अगर आप नहीं भूल पा रहे हैं और जो आपको परेशान करती रहती हैं ,यकीं मानिये मुश्किल नहीं है भूलना और मत कीजिये एक भी कोशिश उन्हें भुलाने की बस बदल लीजिए अपने सोचने का तरीका ,प्रेरणा लेना शुरू कीजिये उन बातों से ,आंकलन  कीजिये दूसरों  का नहीं अपने आप का ,स्वीकार कीजिये गलतियां जो आप से हुई हैं दूसरों  को खुश करने की चाह में और सुधार लीजिये उन गलतियों को ,और सबक लीजिये ज़िन्दगी से जो वो आपको सिखाती है ,कभी न दोहराने की उन गलतियों को फिर से और उभर जाइये हर उस बात से जो अभी तक आपको दुखी करती है और शुरू कीजिये ज़िन्दगी को खुद के लिए जीना ,खुश होना।
तैयार कीजिये अपने अंदर एक ऐसा योद्धा जो तैयार है ,सभी नकारात्मक विचारों को,बातों को प्रेरणा में बदलकर आगे बढ़ने के लिए ,और सकारात्मकता को अपने विचार और व्यवहार में भरने के लिए , प्रयासरत रहिये खुद को बेहतर बनाने के लिए ,और बन जाइये वही जो आप बनना चाहते हैं।
तोड़ दीजिये हर उस सोच को जो आपके विचारों को बेड़ियों से बांधे  हुई है ,छोड़ दीजिये दूसरों की परवाह करना  और वही कीजिये जो आपको सही लगता हैं ,खुद को आज़ाद कर लीजिये हर पैमाने से जो मापता हो आपके हंसने के तरीके को ,बात करने के लहजे को  या फिर आपके हर अंदाज़ को ,क्योंकि आप कैसे जीना चाहते हैं ये आपका फैसला होना चाहिए न कि  दूसरों   का।
कोई फर्क नहीं पड़ता की आप आज किन ऊंचाइयों को छू  रहे हैं या छूना चाहते हैं ,फर्क बस इतना है कि क्या आप  ये सब कुछ पाकर खुश है ,क्योंकि ज़िन्दगी एक ही बार मिलती है और ये हम सबने बहुत बार सुना है और शायद कहा भी होगा ,तो मन में ठान लीजिये कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो ,"मन के हारे हार है,मन के जीते जीत "  और फहरा दीजिये परचम अपनी खुशियों का ,जीने के अंदाज़ का और भर दीजिये सभी को अपनी सकारात्मकता से ,खुशियों से।
धन्यवाद।

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