गंगोत्री आप शायद समझ नहीं पाए होंगे की ये अल्मोड़ा में कैसे आ गया ,तो सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगी कि ये कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट अल्मोड़ा के गर्ल्स होस्टल का नाम है।
तो ये तो हुआ आपका परिचय ,जब हम कॉलेज में पढ़ रहे थे तब दो ही होस्टल्स हुआ करते थे ,बाद में और भी नए होस्टल्स बन रहे थे तब हम पास आउट हो चुके थे।
तो शुरू करते हैं ,कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट ,जो अल्मोड़ा से कुछ 35 किमी दूर है और बहुत ही भव्य और सुन्दर इसका परिसर है ,खासकर एडमिन ब्लॉक ,हमारे समय में दो ही कोर्स थे बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० ,हमें सुअवसर मिला एम० सी ० ए ० में पढ़ने का ,क्योंकि शौक था सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का।
हमें पहले साल सौभाग्य मिला गंगोत्री में रहने का ,फर्स्ट ईयर बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० दोनों वही ठूंसे जाते थे ,बस शुरू हुआ कॉलेज का सफ़र और उससे भी यादगार हॉस्टल का सफ़र ,हम पांच लड़कियां थी हमारे कोर्स में बाकि लड़के थे ,तो यही से शुरू हुआ हॉस्टल का सफ़र जहाँ एक रूम में तीन लड़कियां होती थी ,पहले कुछ मेलमिलाप फिर घरवालों से फ़ोन पर बात करने के लिए खिड़कियों पर लटकना या फिर थैलियों को खिड़की में टांग कर उसमे फ़ोन रखकर हैडफ़ोन से घरवालों से बात करना और वो हच के सिग्नल जो ढूंढने पड़ते थे ,खैर हम उन्हें ढूंढ ही लेते थे ,और रात को वाशरूम अकेले जाने में डरना और सबका मज़ाक उड़ाना।
मामू की मेस और मेस वाले भैय्या लोग ,और वो मेस में लगा एक्वा गार्ड का पानी सब कमाल था और आखिरकार हमारे सीनियर्स ने हमें दर्शन दिए ,यहाँ पर मैं आपको बताना चाहूंगी की हमारे सीनियर्स और सुपर सीनियर्स (मैम्स ) सब बहुत प्यारी थी पर कानून तो कानून होता है तो रैगिंग तो लेनी थी पर बहुत ही हैल्दी रैगिंग थी और मुझे बहुत मज़े आये और शुरू हुए नियम तेल लगी चोटी,फ्लैट चप्पल ,पिन अप दुपट्टा और सीनियर्स को उनकी चप्पलों से पहचानने का सिलसिला,और आँखें झुकाने का ,और एक चीज़ जो बहुत अच्छी थी कि हमारे सीनियर्स हमें कहीं भी हो साथ जाने को बोलते थे ,वो बायोडाटा, जाने कितने बनाये होंगे ,पर पहली बार लिखने में मज़ा आया था और बाद में पूछिए मत ,सीनियर्स का रूम पर आना और फिर शुरू होता था हमारा डांस सेशन और गाना ,और इंट्रो और इन सब में उस नए माहौल में ढलने के लिए हमारी मदद करने वाली हमारी सीनियर्स ही थीं और पाँचों ही बहुत प्यारी थी ,एक नटखट और चुलबुली ,एक बहुत खूबसूरत ,और दूसरी दबंग और एक मेरे ही जैसी और एक पढ़ाकू,ये थी हमारी सीनियर्स और हमने इनके चेहरे फ्रेशर्स के बाद ही देखे थे पर हम छुप छुपा के मैम्स को देख ही लिया करते थे और उनकी चप्पलों के रंग से लेकर उनका बायोडाटा सब याद करवाया गया था हमें ,तो फिर थे हमारे सुपर सीनियर्स ,उनमें चार मैम्स थी और वहां तो हमने ग़ज़लों पर भी डांस किया था ,होश वालो को खबर क्या ,पहले जब ये गाना सुनते थे तब पता नहीं था कि कभी इस पर डांस भी करना होगा पर रैगिंग में भी हमें बहुत मज़ा आया और फिर फ्रेशर्स के बाद हम आज़ाद थे पर अभी भी हमने साथ ही जाना होता था और हम पांचो ने पहाड़ भी एक साथ ही छान मारे और फिर एग्जाम और वो रातों को जागना और 2 बजे रात को वो मैगी और कॉफी का बनाना और फिर बर्तन कौन धोएगा उसके लिए महाभारत ये बात और है कि बर्तन दो ही थे पर फिर भी लड़ाई ज़रूरी थी।
और यहाँ पर मैं बी ० टेक ० फर्स्ट ईयर को भी आपसे मिलवाना चाहूंगी जिनसे हमारी रैगिंग के दौरान दोस्ती हुई थी ,उस समय आपको हॉस्टल में रात को दो बजे बाल धोती लड़कियां मिल जाएँगी क्योंकि सुबह बिना तेल के बाहर नहीं जा सकते थे।
हॉस्टल में सुबह ही बाल्टी बाथरूम में लगा कर घेर लिया जाता था ,ये भी एक बहुत मेहनत का काम होता था ,कभी कभी इस पर भी जंग छिड़ती थी ,कपड़े धोना भी एक बहुत बड़ा काम था और जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था ,वो था चाय का समय जब पाँचों साथ बैठकर गप्पे लगाते थे ,मिमक्री करते थे और कॉलेज में हुई एक एक बात का बाल की खाल निकालने तक परीक्षण होता था और वो असाइनमेंट्स ,तब हमारे नए टीचर्स आये थे ,जो हमे असाइनमेंट्स पर असाइनमेंट्स देते रहते थे और हम बहुत परेशान ,और आज हमें ये समझ नहीं आता कि टीचर्स ने हमको ज़्यादा परेशान किया या हमने उनको 😂हमारे टीचर्स होटल के ही कैंपस में रहते थे और हम उनके दिखते ही छुपने के लिए तैयार रहते थे ,यहाँ पर मैं कहना चाहूंगी की हमारे सभी टीचर्स बहुत अच्छे थे और जो असाइनमेंट पे असाइनमेंट देते थे तो हम भी तैयार रहते थे ,एक मास्टर कॉपी बनती थी और हॉस्टल में छपाई शुरू ,वैसे हम उसे वहां टीपना कहते थे 😂 और यहाँ पर बातों ही बातों में मैं आपको गंगोत्री के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य से मिलाना भूल ही गयी ,जो थे हमारे प्यारे पप्पू जी।
ये पप्पू जी एक तरह का कीड़ा हुआ करते थे ,लाल और काली धारियों वाले और जिसे भी ये बाइट देते थे वह स्थिति भयावह होती थी तो कोशिश रहती थी की पप्पू जी से बच के रहा जाये और न ही हमें ये सुअवसर प्राप्त हुआ।
हॉस्टल का जो मुख्य भाग था वो था कॉरिडोर जहाँ पर आपको बेसुरा गाना गाती हुई,कभी फोन पर बिजी तो कभी पढ़ती हुई लड़कियाँ मिल जाएँगी और एक होता था कॉमन रूम जहाँ आपको टीवी के रिमोट के लिए झगड़ती लड़किया भी मिल जाएँगी और फिर एक नाम सुनने में आया ,पहले तो समझ ही नहीं आया कि है कौन ?फिर बाद में पता लगा वो थी हमारी हॉस्टल वार्डन ,नाम मैं यहाँ पर नहीं लूंगी पर है वो वैसी ही थी जैसा सुना था। वो सुबह दूसरे के गिलास चुरा के उसमें चाय लाना और जूठा गिलास उसी के कमरे में रख आना और फिर वो नोंक झोंक ,वो एक दूसरे के कपड़े पहनना और अपने कपङे न मिलने पर दोस्तों की अलमारी में ढूंढना ,वो पानी भर के रखना और एक मग्गा पानी लेने के लिए भी लड़ जाना ,वो सिंटिला की मस्ती और आरोहण का खुमार, वो सी ० एच ० सी ० की यादें ,वो सबका एक के बीमार पड़ने पर एक दूसरे की देखभाल करना।
वो छत पर लेट कर तारों को देखना ,वो घर से आती कचौरियां और रसगुल्ले और मक्के दी रोटी और सरसो दा साग जो सब खाते थे सिवाय उसके जो लाता था ,यहाँ पर मैं आपको "पकवान" से मिलवाना चाहूंगी जिसे हमारी प्रिय सहेली लायी थी पर ये और बात हैं की मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसे पकवान कहते क्यों हैं ,क्योंकि नाम सुनते ही बड़ी आशायें जाग जाती हैं 😂
लिखने को बहुत कुछ है ,पर तीन साल एक पन्ने पर लिखना मुश्किल है ,अगर आप चाहेंगे तो यमुनोत्री पर भी प्रकाश डाला जायेगा ,पसंद आये तो प्लीज कमेंट और फॉलो करें।
धन्यवाद्।
तो ये तो हुआ आपका परिचय ,जब हम कॉलेज में पढ़ रहे थे तब दो ही होस्टल्स हुआ करते थे ,बाद में और भी नए होस्टल्स बन रहे थे तब हम पास आउट हो चुके थे।
तो शुरू करते हैं ,कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट ,जो अल्मोड़ा से कुछ 35 किमी दूर है और बहुत ही भव्य और सुन्दर इसका परिसर है ,खासकर एडमिन ब्लॉक ,हमारे समय में दो ही कोर्स थे बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० ,हमें सुअवसर मिला एम० सी ० ए ० में पढ़ने का ,क्योंकि शौक था सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का।
हमें पहले साल सौभाग्य मिला गंगोत्री में रहने का ,फर्स्ट ईयर बी० टेक ० और एम० सी ० ए ० दोनों वही ठूंसे जाते थे ,बस शुरू हुआ कॉलेज का सफ़र और उससे भी यादगार हॉस्टल का सफ़र ,हम पांच लड़कियां थी हमारे कोर्स में बाकि लड़के थे ,तो यही से शुरू हुआ हॉस्टल का सफ़र जहाँ एक रूम में तीन लड़कियां होती थी ,पहले कुछ मेलमिलाप फिर घरवालों से फ़ोन पर बात करने के लिए खिड़कियों पर लटकना या फिर थैलियों को खिड़की में टांग कर उसमे फ़ोन रखकर हैडफ़ोन से घरवालों से बात करना और वो हच के सिग्नल जो ढूंढने पड़ते थे ,खैर हम उन्हें ढूंढ ही लेते थे ,और रात को वाशरूम अकेले जाने में डरना और सबका मज़ाक उड़ाना।
मामू की मेस और मेस वाले भैय्या लोग ,और वो मेस में लगा एक्वा गार्ड का पानी सब कमाल था और आखिरकार हमारे सीनियर्स ने हमें दर्शन दिए ,यहाँ पर मैं आपको बताना चाहूंगी की हमारे सीनियर्स और सुपर सीनियर्स (मैम्स ) सब बहुत प्यारी थी पर कानून तो कानून होता है तो रैगिंग तो लेनी थी पर बहुत ही हैल्दी रैगिंग थी और मुझे बहुत मज़े आये और शुरू हुए नियम तेल लगी चोटी,फ्लैट चप्पल ,पिन अप दुपट्टा और सीनियर्स को उनकी चप्पलों से पहचानने का सिलसिला,और आँखें झुकाने का ,और एक चीज़ जो बहुत अच्छी थी कि हमारे सीनियर्स हमें कहीं भी हो साथ जाने को बोलते थे ,वो बायोडाटा, जाने कितने बनाये होंगे ,पर पहली बार लिखने में मज़ा आया था और बाद में पूछिए मत ,सीनियर्स का रूम पर आना और फिर शुरू होता था हमारा डांस सेशन और गाना ,और इंट्रो और इन सब में उस नए माहौल में ढलने के लिए हमारी मदद करने वाली हमारी सीनियर्स ही थीं और पाँचों ही बहुत प्यारी थी ,एक नटखट और चुलबुली ,एक बहुत खूबसूरत ,और दूसरी दबंग और एक मेरे ही जैसी और एक पढ़ाकू,ये थी हमारी सीनियर्स और हमने इनके चेहरे फ्रेशर्स के बाद ही देखे थे पर हम छुप छुपा के मैम्स को देख ही लिया करते थे और उनकी चप्पलों के रंग से लेकर उनका बायोडाटा सब याद करवाया गया था हमें ,तो फिर थे हमारे सुपर सीनियर्स ,उनमें चार मैम्स थी और वहां तो हमने ग़ज़लों पर भी डांस किया था ,होश वालो को खबर क्या ,पहले जब ये गाना सुनते थे तब पता नहीं था कि कभी इस पर डांस भी करना होगा पर रैगिंग में भी हमें बहुत मज़ा आया और फिर फ्रेशर्स के बाद हम आज़ाद थे पर अभी भी हमने साथ ही जाना होता था और हम पांचो ने पहाड़ भी एक साथ ही छान मारे और फिर एग्जाम और वो रातों को जागना और 2 बजे रात को वो मैगी और कॉफी का बनाना और फिर बर्तन कौन धोएगा उसके लिए महाभारत ये बात और है कि बर्तन दो ही थे पर फिर भी लड़ाई ज़रूरी थी।
और यहाँ पर मैं बी ० टेक ० फर्स्ट ईयर को भी आपसे मिलवाना चाहूंगी जिनसे हमारी रैगिंग के दौरान दोस्ती हुई थी ,उस समय आपको हॉस्टल में रात को दो बजे बाल धोती लड़कियां मिल जाएँगी क्योंकि सुबह बिना तेल के बाहर नहीं जा सकते थे।
हॉस्टल में सुबह ही बाल्टी बाथरूम में लगा कर घेर लिया जाता था ,ये भी एक बहुत मेहनत का काम होता था ,कभी कभी इस पर भी जंग छिड़ती थी ,कपड़े धोना भी एक बहुत बड़ा काम था और जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था ,वो था चाय का समय जब पाँचों साथ बैठकर गप्पे लगाते थे ,मिमक्री करते थे और कॉलेज में हुई एक एक बात का बाल की खाल निकालने तक परीक्षण होता था और वो असाइनमेंट्स ,तब हमारे नए टीचर्स आये थे ,जो हमे असाइनमेंट्स पर असाइनमेंट्स देते रहते थे और हम बहुत परेशान ,और आज हमें ये समझ नहीं आता कि टीचर्स ने हमको ज़्यादा परेशान किया या हमने उनको 😂हमारे टीचर्स होटल के ही कैंपस में रहते थे और हम उनके दिखते ही छुपने के लिए तैयार रहते थे ,यहाँ पर मैं कहना चाहूंगी की हमारे सभी टीचर्स बहुत अच्छे थे और जो असाइनमेंट पे असाइनमेंट देते थे तो हम भी तैयार रहते थे ,एक मास्टर कॉपी बनती थी और हॉस्टल में छपाई शुरू ,वैसे हम उसे वहां टीपना कहते थे 😂 और यहाँ पर बातों ही बातों में मैं आपको गंगोत्री के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य से मिलाना भूल ही गयी ,जो थे हमारे प्यारे पप्पू जी।
ये पप्पू जी एक तरह का कीड़ा हुआ करते थे ,लाल और काली धारियों वाले और जिसे भी ये बाइट देते थे वह स्थिति भयावह होती थी तो कोशिश रहती थी की पप्पू जी से बच के रहा जाये और न ही हमें ये सुअवसर प्राप्त हुआ।
हॉस्टल का जो मुख्य भाग था वो था कॉरिडोर जहाँ पर आपको बेसुरा गाना गाती हुई,कभी फोन पर बिजी तो कभी पढ़ती हुई लड़कियाँ मिल जाएँगी और एक होता था कॉमन रूम जहाँ आपको टीवी के रिमोट के लिए झगड़ती लड़किया भी मिल जाएँगी और फिर एक नाम सुनने में आया ,पहले तो समझ ही नहीं आया कि है कौन ?फिर बाद में पता लगा वो थी हमारी हॉस्टल वार्डन ,नाम मैं यहाँ पर नहीं लूंगी पर है वो वैसी ही थी जैसा सुना था। वो सुबह दूसरे के गिलास चुरा के उसमें चाय लाना और जूठा गिलास उसी के कमरे में रख आना और फिर वो नोंक झोंक ,वो एक दूसरे के कपड़े पहनना और अपने कपङे न मिलने पर दोस्तों की अलमारी में ढूंढना ,वो पानी भर के रखना और एक मग्गा पानी लेने के लिए भी लड़ जाना ,वो सिंटिला की मस्ती और आरोहण का खुमार, वो सी ० एच ० सी ० की यादें ,वो सबका एक के बीमार पड़ने पर एक दूसरे की देखभाल करना।
वो छत पर लेट कर तारों को देखना ,वो घर से आती कचौरियां और रसगुल्ले और मक्के दी रोटी और सरसो दा साग जो सब खाते थे सिवाय उसके जो लाता था ,यहाँ पर मैं आपको "पकवान" से मिलवाना चाहूंगी जिसे हमारी प्रिय सहेली लायी थी पर ये और बात हैं की मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसे पकवान कहते क्यों हैं ,क्योंकि नाम सुनते ही बड़ी आशायें जाग जाती हैं 😂
लिखने को बहुत कुछ है ,पर तीन साल एक पन्ने पर लिखना मुश्किल है ,अगर आप चाहेंगे तो यमुनोत्री पर भी प्रकाश डाला जायेगा ,पसंद आये तो प्लीज कमेंट और फॉलो करें।
धन्यवाद्।

Hostel life 😍
ReplyDelete😘😘😘😘
DeleteWow, lovely days
ReplyDeleteActually true
DeleteYaad dila diya sab, senior se aise bologe
ReplyDelete😂😂😂😂
DeleteBhut bariya Niharika...🌹🌹
ReplyDeletethanks bhabhi
Deleteबहुत बढ़िया दी।💐👌
ReplyDeleteThanks dear 😊 😊
DeleteBeautiful mam
ReplyDeletethanks dear
DeleteKab pass out kiya apne mam?
Delete2009 m aur apka
DeleteWhich batch pass out you are mam? And right now what's you do?
ReplyDeleteI am 2006-09 batch pass out ,I am a full time mother and homemaker .
DeleteWow.....best time of life ❤❤❤ hume bh mca karne ka hi avsar prapt hua tha mam❤....n mjhe us keede ki bite bh mili 🤣🤣🤣🤣🤣
ReplyDeletesooo cute ..u r the lucky one to get pappu ki byte
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